Thursday, 30 May 2013

संकल्प

में संकल्प करता हु की,  की अपने राष्ट् की,  आर्थिक आजादी, राजनैतिक संप्रुभता, और सांस्कृतिक अस्मिता की, रक्षा करने के लिए, अपने जीवन में, अधिक से अधिक, स्वदेशी सामानों का ही इस्तेमाल करूँगा ।

चीन व् अमेरिका जैसे देशों  ने पाकिस्तान के साथ मिलकर मेरे रास्त्र के खिलाफ जो षड़यंत्र किये हैं,  उनको ध्यान में रखते हुए,  में संकल्प करता हु, की, कभी भी, किसी भी, अमेरिकन कंपनी जैसे, पेप्सी कोला, कोका कोला, कोलगेट, जोंसन एंड जोंसन, रेच्केट एंड कोलमन, प्रोक्ट्रो एंड  आदि कंपनियों का, कोई भी सामान, नहीं खरीदूंगा।  अपने रास्त्र की संस्कृति अस्मिता को बचने के लिए, में संकल्प करता हु, की, यथाशक्ति विदेशी टीवी चंनेल्लो बहिष्कार करूँगा,  मेरी जितनी शक्ति है, उसका इस्तेमाल करके में अन्य दुसरो को, इसी स्वदेशी के संकल्प के लिए प्रेरित करूंगा .....

Tuesday, 28 May 2013

रिक्शा चालक से किसान वैज्ञानिक तक का सफ़र ....

आदरणीय मित्रो ...


जरूर देखें व् अपने अपने बच्चो को बताएं सफलता की ऐसी कहानियाँ  जिनसे सही मायनों में विकाश होगा ....

https://www.youtube.com/watch?v=bKcMKbnyjoI&noredirect=1





रिक्शा चालक से किसान वैज्ञानिक तक का सफ़र ....


कौन कहता है की हुनर के लिए सिर्फ और सिर्फ अंग्रेजी ही जरूरी है ....  क्यों हम भेड़ चाल से चल रहे है ... क्यों हमारे गावं के लोग या शेहरो के आर्थिक रूप से कमजोर भाई लोग आत्म-ग्लानी  से पीड़ित हैं  ...या क्यों आर्थिक रूप से मजबूत भाई लोग अपने अहम् व् अकड़, घमंड में है ... आखिर किसको दिखाना चाहते हैं हम ये ... आखिर किस्से बड़ा दिखना चाहते हैं हम ...  आखिर किसको नीचा दिखाना चाहते हैं हम ..... अपने ही भाइयों को .... क्या येही विकाश है ... क्या ये ही आगे बढ़ना है ... जिसको सायद गावं के लोग समझते है .... क्या येही modernisation की परिभाषा है ...  क्यों नहीं हम अपने व् अपने आस पास के समाज को देखते .. की कैसे हम और हमारी पीढ़िया  जियेंगे .. कैसा होगा विकास का मॉडल ....

आखिर कब निकलेंगे हम अपनी अपनी मानसिक गुलामी से .. और कब हम अपने आप को अपनों के करीब समझेंगे ..

क्या हमारा देश बड़ी-बड़ी कंपनियों से ही विकसित करेगा ... या छोटे छोटे गृह उद्योगों से लाखों करोरों लोगों को रोजगार मिलेगा तभी उन्नति करेगा ... जरा सोचें दोस्तों ... आखिर कैसे 125 क्रोर लोग सही मायनों में विकाश करेंगे ... क्या रास्ता होगा ... हमारा विकाश का ....

तो आओ मिल के सोचे और कदम बढ़ाएं ...


Thursday, 23 May 2013

पथरी का इलाज़....

जरूर सुनें, डाउनलोड करें और फेलायें :
https://www.youtube.com/watch?v=FBW77Ch5UQ8






मित्रो, जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं ) क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|

आयुर्वेदिक इलाज ! 


पखानबेद (पत्थरचट्टा) नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!!


होमियोपेथी इलाज !


आप होमियोपैथी की किसी भी दावा की दुकान से  बरबैरिस वल्गेरिस मदर टीन्चर (Berbaris Vulgaris Mother Tincher) की दवा ले :

15 बूँद 1/4 कप में गुनगुने पानी में डाले और पी ले ..
दिन में 4 बार ही इतनी मात्रा ले ... कम से कम 3 बार अवस्य लें ..
1 - 11/2 या 2 महीने तक ले कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होगा ... फिर चेक कराएँ ... कभी कभी 3 महीने भी लग जाते हैं  ...

जब पूरी तरह से पथरी ख़तम हो जाए तो क्या करना है .. ताकि दुबारा न हो .... क्यों .. क्योकि ये कभी कभी दुबारा भी हो जाती है ... तो

CHINA 1000  नामक दवाई ले
2 बूद जीभ में सीधे डालें ..  
सुबह   दोपहर  शाम   ...... सिर्फ एक ही दिन लें  ..


(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )

जॉनसन एंड जॉनसन/ एमवे खतरनाक है बच्चों/बड़ों के लिए ....


आदरणीय भाइयो  और बहनों :

आओ हम सब निकलें अपनी मानसिक गुलामी से और इन कंपनियों के मायाजाल से, कैसे ये हमे मुर्ख बना के लाखों करोरो कमा रही है और हमे दे रही है खतरनाक बीमारियाँ .... :

अपने बच्चो को Johnson & Johnson विदेशी कंपनी के जहरीले उत्पादो से बचाये ! और उन हरामखोर डाक्टरों से भी बचें जो इस कंपनी से मिलने वालों टुकड़ो की खातिर आपके बच्चो की जान को दाव पर लगा देते हैं ! और आपको इस कंपनी के products इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं !

जरूर फेलायें :

http://www.firstpost.com/business/shocker-jj-baby-powder-contained-cancer-causing-substance-737297.html

http://www.thehindubusinessline.com/companies/jjs-licence-to-make-baby-powder-cancelled/article4654358.ece

http://www.youtube.com/watch?v=hBXx2ROlCBg






Amway के प्रोडक्ट भी सही नहीं सेहत के लिए :



निकलें  अपनी  मानसिक गुलामी से और इन कंपनियों के मायाजाल से : 

28 May 2013:  पिछले साल अपराध शाखा (आर्थिक अपराध) इकाई ने एमवे के त्रिसूर, कोझिकोड तथा कन्नूर के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी मनी चेन गतिविधियों का पता लगाने के लिए की गई थी। इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था।यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है।

नेटवर्किंग मार्केटिंग कंपनी एमवे इंडिया के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विलियम एस पिंकने और कंपनी के दो निदेशकों को आज यहां वित्तीय अनियमितता के आरोप में केरल पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया। अपराध शाखा के सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार निदेशकों में संजय मल्होत्रा और अंशु बुद्धिराजा शामिल हैं।

यह गिरफ्तारी वायनाड की अपराध शाखा द्वारा 2011 में दर्ज तीन मामलों में वॉरंट जारी किए जाने के बाद हुई है। सूत्रों ने बताया कि इन अधिकारियों को प्राइस चिट्स एंड मनी सकरुलेशन स्कीम्स (प्रतिबंध कानून) के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।


कुछ दिनों पहले ही एमवे के तीन उत्पाद के नमूनों की रिपोर्ट फेल आई है। न्यूट्रीलाइट प्रोटीन पाउडर और चाकलेट ड्रिंक जहां मिस ब्रांडिंग और मिस लीडिंग में फंसे हैं। वहीं जांच में न्यूट्रीलाइट कोएंजाइम क्यू-10 अपमिश्रित पाया गया है। इन तीनों फूड सप्लीमेंट के सैंपल की जांच खाद्य सुरक्षा विभाग ने पूना स्थित सेंट्रल लैब से कराई थी। अब विभाग कंपनी और प्रोडक्ट से जुड़ी फर्मों पर केस दायर करने की तैयारी कर रहा है।


नगर निगम हरिद्वार के खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेंद्र कुमार पांडे के मुताबिक 11 दिसंबर 2012 को हरिद्वार स्थित एक एजेंसी से एमवे के तीन प्रोडक्ट न्यूट्रीलाइट प्रोटीन पाउडर, न्यूट्रीलाइट चाकलेट ड्रिंक और न्यूट्रीलाइट कोएंजाइम क्यू-10 के सैंपल भरे थे। जिन्हें जांच के लिए रुद्रपुर लैब भेजा गया, यहां से न्यूट्रीलाइट प्रोटीन पाउडर और चाकलेट ड्रिंक के सैंपल की लेबल कंडीशन को लेकर मिस ब्रांडिंग और मिस लीडिंग पाई गई, जबकि संसाधनों के अभाव का बताते हुए लैब ने न्यूट्रीलाइट कोएंजाइम क्यू-10 के सैंपल जांचने से इंकार कर दिया। जिसके बाद विभाग ने तीनों सैंपल पूना स्थित सेंट्रल लैब जांच के लिए भेजे। सेंट्रल लैब रिपोर्ट का हवाला देते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि न्यूट्रीलाइट प्रोटीन पाउडर और न्यूट्रीलाइट फूड सप्लीमेंट प्रोडक्ट के लेबल पर ‘बेस्ट ऑफ दे नेचर, बेस्ट ऑफ द साइंस’ लिखा गया है। जो जांच में सही नहीं पाया गया है। लेबल कंडीशन में दोनो प्रोडक्ट मिस लीडिंग और मिस ब्रांडिंग पाए गए हैं। सेंट्रल लैब ने न्यूट्रीलाइट कोएंजाइम क्यू-10 फूड सप्लीमेंट के सैंपल की जांच भी की है। जांच में यह प्रोडक्ट अपमिश्रित पाया गया है। इस फूड सप्लीमेंट में माइक्रोस्टेलाइन सेल्युलोज और ट्राई कैल्शियम फास्फेट का प्रयोग किया गया है। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार इनका प्रयोग फूड सप्लीमेंट में नहीं किया जा सकता है। इन्हें स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं बताया गया है

भारत में पिछले कई सालो से एक विदेशी कंपनी जो नेटवर्क मार्केटिंग में बहोत ही आगे बढ़ के काम कर रही हे....एमवे इंडिया......उस के बारे में जो आंकड़े मिले हे वो बहोत ही आश्चर्यजनक हे....और उस से लगता हे की जब एक कंपनी देश का इतना सारा रुपया अपने देश से बाहर ले जा सकती हे सिर्फ चुना लगा के....बाकी तो और बहोत कुछ होगा.....तो पांच हजार से ज्यादा विदेशी कंपनीया कितना रूपया देश से बाहर ले जा रही होगी......

कुछ आंकड़े  हे एमवे कंपनी के बारे में ....में यहाँ पे दिखाता हु आप सबको.........

4200 रूपये ..जब एमवे लेती थी
सामन केवल 2200 का होता था
हर जोइनिंग पर 2000 रूपये ... तो लगभग १ करोड़ लोगो को कंपनी ने जोड़ा था
तो घोटाला हुआ २००० करोड़

यह मिनिमम है
असली रकम 10,000 करोड से ऊपर हो सकती है

बहोत बड़ा घोटाला..........

दोस्तों.....आप सब का क्या कहना हे इस बारे में......


http://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/Amway-India-chairman-arrested-for-financial-irregularities/articleshow/20294411.cms






इसी तरह से होर्लिक्स, बोर्नविटा, बूष्ट आदि में भी कुछ  नहीं है ...सब हमको बेवकूफ बना के हमारे देश का पैसा विदेश भेज जा रहा है ..



Tuesday, 21 May 2013

मुसलमान गो-हत्या नहीं करते थे ... धरमपाल जी

मुसलमान गो-हत्या नहीं करते थे ...  


Muslim not cow slaughtering: Dharampal:






Muslims not perpetrators of cow slaughter in India: Dharampal

Oct 29, 2002 The Times of India news
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'The British origin of cow-slaughter in India', with some British documents on the anti-kine-killing movement 1880-1894, is the latest book by Dharampal.
He added that even those among the few scholars who have taken some note of this movement, have treated it as a Hindu-Muslim conflict. "But such was not the case, as the documents presented in this book show, that many prominent Muslims as well as the Parsis and Sikhs actively participated in the movement. The fact that the movement was directed against the British and not against the Muslims, as commonly believed, was very clear to Queen Victoria and her high-ranking officers," he pointed out.
It was during the British rule, that cow slaughter took place on a large scale to provide beef to the British troops and civilians. "During Muslim rule in India, the number of cattle slaughtered was not more than 20,000 per year. Mahatma Gandhi in a speech in 1917, said that the British were killing about 30,000 cattle everyday for meat. It was the enormous increase in cow slaughter that alarmed the Hindus of North India and led to the country-wide movement of 1880-1894," he declared.

He suggested that a total ban on cow slaughter may bring us closer to our true Indian identity.


http://www.samanvaya.com/dharampal/

एक खबर :

http://www.business-standard.com/article/pti-stories/muslim-community-in-mathura-hold-anti-cow-slaughter-convention-113061000340_1.html





आखिर क्यों खेती को बचाना जरूरी है ...कृषि लोन की असली कहानी ...

जरूर पढ़ें व् फेलायें : 

http://www.jagran.com/editorial/apnibaat-agricultural-loans-distributed-10396705.html


http://epaper.patrika.com/91138/Rajasthan-Patrika-Jaipur/20-02-2013#page/10/2





जून 2013:   2013-14 में 7 लाख करोड़ कृषि लोन देने  घोषणा की गयी ...और अगर समय पर वापस देने पर सिर्फ 4% ब्याज ….
पिछले साल 2012-13, में  5.75 लाख करोड़ और 2011-12 में 4.75 लाख करोड़ लोन दिया गया ...

पिछले 10 सालों में कृषि लोन 750 % बढ़ा  है  मगर फिर भी पिछले 15 सालों में लगभग 3 लाख किसानों ने आत्म-हत्याएं करी हैं ...

40% किसान खेती छोड़ना चाहते है और शहरों की तरफ पलायन करना चाहते हैं

पुरे लोन का सिर्फ 6% ही किसानों को जाता है .. बाकी उद्योगपतियों या कॉरपोरेट को जाता है ... मतलब लगभग सिर्फ 50 हज़ार करोड़ रूपये ही किसानों तक पहुचता है ..
दिल्ली और चंडीगढ़ में दिया जाता है .. जबकि झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और बिहार में लोन नहीं दिया ..आप ही बताये की कितने किसान इन शेहरो में है .. और जहा सही मायनों में जरूरत है वही लोन मिला नहीं ..
RBI 2001 से पहले .. यानी 1990 से जानता है की बड़े बड़े कॉर्पोरेट जैसे sprinker irigration, drip irrigation आदि बिचोलिये ही लोन का बड़ा हिस्सा लेते है ...

अमेरिका में गरीबों को कूपन दिया जाता है ... फिर भी वहाँ  5 करोड़ लोग भूक से पीडित हैं .. अमेरिका में हर 4 में से 1 गरीब है और हर 7 में से 1 भूका है ..

खेती का संकट और कूपन का रोल : सरकार चाहती है की किसान खेती छोड़े, गरीब आदमी उस कूपन को भोग करेगा इसका मतलब सरकार को राशन दुकानों की जरूरत नहीं रहेगी .. इसलिए सरकार को खाद भंडार की भी जरूरत नहीं रहेगी और FCI जैसे संस्थानों की भी जरूरत ख़त्म कर दी जायेगी ..... कहने का मतलब भंडार व्यस्था को ख़तम किया जा रहा है ...
अब अनाज को वायदा बाजार में दाल जा रहा है .. उसमे तो सत्ता होता है ... वही कीमत भी निर्धारित करता है ... उसे Future  Trading कहते है ... दुनिया में रेट बढ़ने का काम यही वायदा बाजार ही करता है ..
इसमें जितना अनाज पैदा नहीं होता, उससे 46 गुणा का व्यापार हो रहा है ..
मक्के का 24 गुणा व्यापर हो रहा है .. जो की सही में पैदा ही नहीं हुआ ... मतलब ये सब एक बुलबुला है .. इससे कोई रोजगार भी सर्जन नहीं होता ...

हैदराबाद की एक रिपोर्ट है .. उसमे बताया गया की सबसे ज्यादा रोजगार भारत में मंदिर मस्जिद चर्चेस और गुरुद्वारा से मिल रहा है ... और दूसरा है सिक्योरिटी गार्ड से ..

हम देश की सम्पन्नता को खेती से अलग नहीं कर सकते ..तो जरूरत है खेती को संपन्न करने की ..

अब लोग सोचेंगे की हमे किसानों से क्या लेना देना ..
GM Foods कोई जीन कीड़े का निकल के आदमी में .. बकरे का जीन आदमी में दाल सकते है ..जैसे मनुष्य के अन्दर 25 हजार और धान में 37 हजार जीन होते है ... इन्हें ही आपस में बदला जा रहा है .. व्यज्ञानिक कहेंगे की अब आपको डाईरा नहीं होगा इत्यादि .. ये मिलावट पूरी दुनिया में चल रही है ..
एक तरफ तो adulteration हो रही है हम सभी  रहे है ... और दूसरी तरफ ये GM Foods भारत में लाये जा रहे है ..
   
BT बेंगन .. BT  Bacillus thuringiensis नाम का कीड़ा है .. भारत सरकार ने बायोटेक्नोलॉजी रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया बिल BRAI रखा है और इसे पास करने की कोशिश हो रही है .... इसमें सिर्फ और सिर्फ कंपनियों का ही फायदा है ..

इसका अध्यन चूहों पर किया गया .. अगर आप फोटो देखेगो ... उनको बड़े बड़े टुमोर हो गए कैंसर के .. अगर चूहों में GM फूड्स का ऐसा असर है तो मनुष्य में कैसा होगा ...

हम जितना बीमार होंगे . उतनी इकनोमिक ग्र्वोथ होगी .. जितना भोजन हमारा ख़राब होगा .. बीमार होङ्गे। दवाइयों पर खर्च बढेगा .. हॉस्पिटल पर कर्च होगा .. इन्शुरन्स को बढ़ावा मिलेगा .. इसलिए FDI इन इन्शुरन्स आ चूका है ...

कहा जाता है की जहाँ तराक्की हुयी है वह किसान ख़तम हुए है .. अमेरिका और यूरोप में किसान ख़तम हुए है ...

पर हमरे यहाँ 60 करोड़ किसान है .. जो अमेरिका की कुल आबादी से भी दुगना है ...  हमारे पास तो दूसरा को रास्ता ही नहीं .. हमारे यहाँ की स्थिति अलग है .. उनके यहाँ अलग है .. तो हमारे यहाँ अलग व्यस्था होनी चाहिए ..

हमें किसानों की स्थिति को सुधारना ही होगा ... जैसा गाँधी जी ने कहा था की हमारे यहाँ तो  "Production by the Masses"  होना चाहिए न की  Production for the masses...

   



देविंदर शर्मा: हमारे भोजन का फैसला जी. एम. कंपनियां करेंगी



जरूर देखें और फेलायें :  

http://www.youtube.com/watch?v=mQm57R7jS8A&feature=em-uploademail-subject6


जी. एम. (जेनेटिकैली मॉडिफाइड) बीजों और फसलों के मानवीय स्वास्थ एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाबों की आशंका से अमेरिका जैसे विकशित देश में भी इनके विरुद्ध जनमत काफी प्रबल है और इस सम्बन्ध मे शोध और प्रयोग करने वाली कंपनियों के विरुद्ध लोग, संस्थाएं और संगठन अक्सर अदालतों मे पहुँच जाती है |

लेकिन इसके बावजूत मार्च माह मे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एच. आर 933 प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करके संघीय अदालतों से ऐसे मुकद्दमे दर्ज करने का संबैधानिक अधिकार हि छीन लिया | इस प्रस्ताव को लोकप्रिय भाषा मे मोनसेनटो प्रोटेक्शन एक्ट के रूप मे जाना जाता है | इस कानून के लागु होने से मोनसेनटो के उप्पादों के जीवन और पर्यावरण पर दुष्प्रभावो के बावजूत न तो उसे जी एम फसलों के शोध से रोका जा सकेगा और न हि जनता के सामने ऐसे खाद्यान्न का उपभोग करने के अलावा और कोई चारा रहेगा |

22 अप्रैल को 2–G स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लाक घोटाले के शोर – शराबे मे भारत सरकार ने संसद मे भारतीय जेब टेक्नोलॉजी मे नियमन प्राधिकरण (ब्राइ या बी आर ए आई) बिधेयक 2013 पारित कर दिया | यह बिधेयक पारित होने से बायोटेक्नोलॉजी नीति उपक्रमों के संघ (ए बी एल इ या एबल) ने खूब खुशियाँ मनाई |

यह बिधेयक पास करने के लिए सरकार ने विश्वविख्यात कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता मे 2004 मे गठित की गई कृषि बायोटेक्नोलॉजी टास्कफोर्स की सिफारिशों को भी ताक पर रख दिया | भारत सरकार ने भी इस विधेयेक के माध्यम से बिओतच्नोलोग्य कंपनियों के रास्ते के सभि अवरोध ओबामा की तरह हि दूर कर दिए हैं | अनेक अर्थों मे भारतीय बिधेयक भी ओबामा की बिधेयक जैसा हि है |

ब्राइ बिधेयक पास होने से बायोटेक्नोलॉजी कंपनियां जी. एम. फसलों के लिए फटाफट और एकल खिड़की अनुमति एवं क्लियरेन्स हासिल कर सकेंगी | यहाँ तक की “गोपनीय व्यावसायिक जानकारी” के पर्दे मे इस विधेयक ने इन कंपनियों को सुचना अधिकार के प्रभाव क्षेत्र से भी बाहर निकल दिया है | कई मामलो मे तो इन्हें अदालती क्षेत्राधिकार से भी मुक्त कर दिया गया है | इस तरह बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों और जी. एम. फसलों को शसक्त और कानून संगत कवच प्रदान कर दिया गया है |

पारदर्शिता और जवाबदेही की गला घोटने की जरुरत वोहीं पड़ती है जहाँ किसी खतरनाक चीज को जनता की निगाहों से छिपाना हो | इस काम की शुरुआत सबसे पहले बरिष्ट सरकारी पदों पर बैठे इस उद्योग के समर्थक वैज्ञानिकों और यूनिवर्सिटीयों के प्रोफेसोरों द्वारा होती है जो ‘विज्ञानं – आधारित’ चर्चाओं के नाम पर तथ्यों की तोड़ – मरोड़ करते हैं | ऐसे लोगों मे से कोई भी यह मानने को तैयार नही की जी. एम. फसलें भी पश्चिमी देशों मे ‘मैड काऊ डीजीज’ जैसे खतरनाक रोग के लिए जिम्मेदार थी |

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् खाद्य सुरक्षा के नाम पर बहुत जोर शोर से जी. एम. फसलों के पक्ष मे प्रचार कर रहीं है | जब पर्यावरण मंत्रालय ने इसके वैज्ञानिक दावों पर सवाल उठायें और इस फसलों (खासकर बी.टी. बैगन) की खेती पर 2010 में प्रतिबंध लगा दिया तो उद्योग बचाव की मुद्रा मे आ गया और साथ प्रमुख राज्यों ने इस फसलों की प्रयोगात्मक खेती के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया | फिर पि एम ओ हरकत मे आया और विधेयक को तैयार करने का काम पर्यावरण मंत्रालय से छीन कर साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्रालय के हवाले कर दिया |

इस विधेयक पर गंभीर चर्चा की जरुरत है इसलिए की देश के प्रत्येक व्यक्ति पर जी. एम फसलों के दुष्प्रभाव की तलवार लटक रहीं है | लेकिन पि.एम.ओ. को तो केवल कॉर्पोरेट हितों के कल्याण की हि चिंता है | इस विधेयक ने बायोटेक्नोलॉजी कंपनियो को आपके भोजन, स्वास्थ और पर्यावरण से खिलवाड़ करने की असीम शक्तियां प्रदान कर दी हैं | आप चाहे पसंद करें या न, अब सरकार और जी. एम. कंपनियां यह फैसला करेगी की आप को क्या खाने पर मजबूर किया जाये ?

जरूर पढ़ें व् फेलायें : 

http://tehelka.com/who-decides-what-we-eat/